आदि शक्ति माँ सूर्यकुमारी के अनन्य भक्त ब्रम्हलीन श्री सुरेश चंद्र अग्निहोत्री की निर्मल चरित्र की गाथा
सतगुरु भगवान की जय आदि शक्ति माँ सूर्यकुमारी के अनन्य भक्त ब्रम्हलीन श्री सुरेश चंद्र की निर्मल चरित्र की गाथा आदि शक्ति माँ सूर्यकुमारी के अनन्य भक्त ब्रम्हलीन श्री सुरेश चंद्र अग्निहोत्री की निर्मल चरित्र की गाथा श्री श्री----- ∞ , अनंत प्रकाश जी महाराज उर्फ गुदड़ी वाले बाबा (पीलीकोठी, चित्रकूट) की परम प्रिय शिष्या, श्री श्री----१००८ आदि शक्ति ब्रम्हलीन माँ सूर्य कुमारी (बाबू का पुरवा, रालपुर, रायबरेली) के परम प्रिय भक्त ब्रम्हलीन श्री श्री----१०८ भक्त सुरेश चंद्र (कोरवाँ, रायबरेली) के कमलवत चरणो में ये सम्पूर्ण जीवन सादर समर्पित है। महामंत्र- ध्यानमूलं गुरुर्मूर्तिः पूजामूलं गुरुर्पदम् । मन्त्रमूलं गुरुर्वाक्यं मोक्षमूलं गुरूर्कृपा ॥ गुरु की मान्यता - ध्यान की नींव गुरु की छवि है, पूजा की नींव गुरु के चरण हैं, गुरु के वाक्य मंत्र के समान हैं, मोक्ष केवल गुरु कृपा से ही संभव है।